न जाने किस मोड़ पर ले आई है ये ज़िन्दगी

 न जाने किस मोड़ पर ले आई है ये ज़िन्दगी,

अब तो हर खुशी भी लगती है अजनबी।

जिसे चाहा था हमने दिल-ओ-जान से,

आज वही हमें भुला बैठे किसी अजनबी की तरह।





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